हरिद्वार से जुड़ी बड़ी धार्मिक खबर। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण ने बड़ा अनुशासनात्मक फैसला लेते हुए पांच संतों और महंतों को अखाड़े से आजीवन निष्कासित कर दिया है। तमिलनाडु के कांचीपुरम में आयोजित अखाड़े की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया। साथ ही इन संतों का हुक्का-पानी बंद करने और उनसे सभी धार्मिक एवं संगठनात्मक संबंध समाप्त करने का भी फैसला लिया गया।
श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण की तमिलनाडु के कांचीपुरम में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में देशभर से पहुंचे उदासीन संतों ने अखाड़े के अनुशासन और परंपराओं को ध्यान में रखते हुए सर्वसम्मति से पांच संतों और महंतों को आजीवन निष्कासित करने का निर्णय लिया।
अखाड़े के श्रीमहंत दुर्गादास महाराज ने बताया कि निष्कासित किए गए संतों में श्रीमहंत रघुमुनि, उग्र दास, ज्येन्द्र मुनि (शाहपुर, कनखल), स्वामी शिवानंद (प्रयागराज) और सेवादास (मतौली, हरिद्वार) शामिल हैं।
बैठक में यह भी तय किया गया कि इन सभी संतों के साथ अखाड़े के धार्मिक एवं संगठनात्मक संबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएंगे। साथ ही परंपरा के अनुसार उनका हुक्का-पानी भी बंद किया जाएगा।
अखाड़ा प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय संगठन की मर्यादा, अनुशासन और परंपराओं को बनाए रखने के उद्देश्य से सर्वसम्मति से लिया गया है। अब इस फैसले की चर्चा संत समाज और धार्मिक जगत में तेज हो गई है।
बड़ा उदासीन अखाड़े का बड़ा फैसला, पांच संत आजीवन निष्कासित












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