डीएम मयूर दीक्षित की सख्ती से खुलीं खनन गड़बड़ियां, कई रिटेल भंडारण सीज रामपुर रायघटी में जांच के दौरान मिलीं गंभीर अनियमितताएं, खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

हरिद्वार। जनपद में अवैध खनन के खिलाफ जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की सख्त कार्यशैली का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। लक्सर तहसील के ग्राम रामपुर रायघटी में अवैध खनन और संदिग्ध खनिज भंडारण की शिकायतों पर जिलाधिकारी के निर्देश के बाद हुई कार्रवाई में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई ने जहां अवैध खनन गतिविधियों पर शिकंजा कसने का काम किया है, वहीं खनन विभाग की निगरानी व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन और खनिज भंडारण की शिकायतें सामने आ रही थीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित विभागों को इसकी जानकारी होने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अवैध गतिविधियां लगातार बढ़ती रहीं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि विभागीय अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण और निगरानी क्यों नहीं की गई।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देश पर जिला प्रशासन और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने रामपुर रायघटी क्षेत्र में विभिन्न रिटेल भंडारण स्थलों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान सभी भंडारण इकाइयों में नियमों के उल्लंघन और अभिलेखीय अनियमितताएं पाई गईं। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से संबंधित रिटेल भंडारण इकाइयों को सीज कर दिया। साथ ही उनके ई-खन्ना पोर्टल भी अस्थायी रूप से निलंबित कर दिए गए हैं, जिससे उनके संचालन पर रोक लग गई है।
कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि जिलाधिकारी स्वयं मामले में हस्तक्षेप नहीं करते तो ये अनियमितताएं शायद सामने ही नहीं आ पातीं। इस कार्रवाई के बाद जिला खनन अधिकारी काजिम रजा सहित विभागीय तंत्र की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
हालांकि जिला खनन अधिकारी का कहना है कि जनपद में अवैध खनन के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बावजूद इसके, हालिया घटनाक्रम ने विभागीय जवाबदेही और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
वहीं स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए उम्मीद जताई है कि अवैध खनन के खिलाफ इसी तरह की सख्ती आगे भी जारी रहेगी, जिससे खनन माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

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