हरिद्वार। उत्तराखंड राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर काली सेना ने शुक्रवार 09 नवम्बर 2025 को प्रदेश हित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर संकल्प पत्र जारी किया। संगठन ने देवभूमि की सनातन परंपराओं की रक्षा, प्रवास रोकने, बेरोजगार युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा जैसे बिंदुओं को प्राथमिकता में रखा है।
काली सेना द्वारा जारी संकल्प पत्र में कहा गया है कि हिमालय, गंगा-यमुना व चारधामों की पवित्रता ही उत्तराखंड की पहचान है। इसलिए देवभूमि को धर्मनिष्ठ, संस्कारी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए संगठन आगामी एक वर्ष तक कई अभियान चलाएगा। यह संकल्प 09 नवंबर 2026 तक लागू रहेगा।
संकल्प पत्र में उल्लेखित मुख्य बिंदु निम्न हैं:
- मंदिरों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण हेतु जिलों में जागरण यात्राएँ एवं जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।
- उत्तराखंड के युवाओं को प्रशिक्षित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास बढ़ाए जाएँगे।
- पहाड़ों से पलायन रोकने के लिए घर-घर जागरूकता अभियान चलाकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा।
- गौ-धन संरक्षण के लिए सड़क सुरक्षा प्रणाली मजबूत करने और गो-पोषण इकाइयों का निर्माण करवाने का संकल्प।
- हरिद्वार व देहरादून के बीच स्थित धार्मिक स्थलों की सुरक्षा, अवैध कब्जों पर रोक और न्यायिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास।
- गांव-गांव हिंदू पंचायतों के गठन से सामाजिक एकजुटता बढ़ाने की योजना।
- व्यापारियों से अपने प्रतिष्ठानों के नाम में हिंदू सांस्कृतिक पहचान जोड़ने की अपील।
- पूरे उत्तराखंड में 10 लाख सक्रिय सदस्य और सवा लाख काली सैनिक तैयार करने का लक्ष्य।
संकल्प पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि संगठन के सभी अभियान शांतिपूर्ण व वैधानिक दायरे में संचालित होंगे। प्रमुख उद्देश्य उत्तराखंड के अस्तित्व, संस्कृति और जनसंख्या संतुलन की रक्षा करना है।
दस्तावेज पर काली सेना हरिद्वार के जिलाध्यक्ष हरीश देवी के हस्ताक्षर अंकित हैं। संगठन ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया है कि वे इस मुहिम में शामिल होकर उत्तराखंड को सनातन मूल्यों के अनुरूप सशक्त और सुरक्षित राज्य बनाने में योगदान दें।



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