बाल्टिक देशों में सनातन संस्कृति का विस्तारडॉ. चिन्मय पंड्या के संचालन में विलनियस में गायत्री यज्ञ का आयोजनहरिद्वार |

8 फरवरी

सनातन संस्कृति का वैश्विक विस्तार लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। अपने विदेश प्रवास के दौरान अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या लिथुआनिया की राजधानी विलनियस पहुँचे, जहाँ उन्होंने राजधानी स्थित प्रसिद्ध बैलेंस सेंटर में वैदिक विधि-विधान से गायत्री यज्ञ का आयोजन कराया।
इस आध्यात्मिक अनुष्ठान में स्थानीय लिथुआनियाई नागरिकों, भारतीय समुदाय के सदस्यों तथा गायत्री परिवार से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में सहभागिता की। वैदिक मंत्रोच्चार और पवित्र अग्नि में आहुतियों के साथ सम्पन्न हुए यज्ञ से सम्पूर्ण वातावरण शांति, सकारात्मक ऊर्जा और पवित्र चेतना से ओतप्रोत हो गया।
गायत्री यज्ञ के दौरान सर्वे भवन्तु सुखिनः, प्रकृति के साथ सामंजस्य तथा मानवीय चेतना के उत्थान की कामना की गई। प्रतिभागियों ने इस आयोजन को केवल धार्मिक कर्मकांड न मानकर आंतरिक संतुलन, मानसिक शांति और सामूहिक चेतना के जागरण की एक प्रभावी प्रक्रिया के रूप में अनुभव किया।
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि प्राचीन भारतीय वैदिक साधनाएँ आज के आधुनिक वैश्विक समाज में संतुलन, शांति, नैतिक मूल्यों और एकता की स्थापना में अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पूर्व और पश्चिम के बीच सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सेतु को और अधिक मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान लिथुआनियाई नागरिकों और युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। उन्होंने यज्ञ के प्रतीकात्मक अर्थ, पंचतत्त्वों के साथ मानव के संबंध तथा प्रकृति-सम्मान की भारतीय दृष्टि को लेकर गहरी जिज्ञासा और सराहना व्यक्त की।
यह आयोजन बाल्टिक क्षेत्र में वैदिक परंपराओं के प्रति बढ़ती जागरूकता और रुचि का सशक्त प्रमाण बना। कार्यक्रम ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के मुख्यालय शांतिकुंज, हरिद्वार तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय की वैश्विक दृष्टि को भी रेखांकित किया।
गौरतलब है कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार द्वारा संचालित एशिया का प्रथम एवं विश्व का सबसे बड़ा बाल्टिक सेंटर भारत और बाल्टिक देशों के बीच अकादमिक सहयोग, सांस्कृतिक संवाद और आध्यात्मिक आदान-प्रदान का एक मजबूत मंच बनकर उभर रहा है।

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