धर्मनगरी हरिद्वार में एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज के राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर में आज समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम देखने को मिला। शिविर के चौथे दिन छात्राओं ने बस्तियों में जाकर जल संरक्षण और अक्षय ऊर्जा का संदेश दिया, वहीं आत्मरक्षा प्रशिक्षण के जरिए अपनी सुरक्षा के गुर भी सीखे। आइए दिखाते हैं यह खास रिपोर्ट।

धर्मनगरी हरिद्वार के एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना यानी एनएसएस के सात दिवसीय विशेष शिविर के चौथे दिन छात्राओं ने समाज को जल संरक्षण, अक्षय ऊर्जा और महिला सशक्तिकरण का संदेश दिया। इस दौरान छात्राओं ने आत्मरक्षा के गुर भी सीखे और कई रचनात्मक गतिविधियों में भाग लिया।
एस.एम.जे.एन. पी.जी. कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के चौथे दिन की शुरुआत उत्साह और ऊर्जा के साथ हुई। दिन की शुरुआत योगाभ्यास और मां गंगा की भव्य आरती के साथ की गई। इसके बाद स्वयंसेवी छात्राओं और शिक्षिकाओं ने कॉलेज द्वारा अधिग्रहित बैरागी कैंप क्षेत्र की बस्तियों में जनसंपर्क अभियान चलाया और स्थानीय लोगों को सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण और अक्षय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष व्याख्यान भी आयोजित किए गए। डॉ. पद्मावती तनेजा ने ‘जल शक्ति अभियान’ और ‘अटल भूजल योजना’ के बारे में जानकारी देते हुए वर्षा जल संचयन और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया।
वहीं डॉ. पुनिता शर्मा ने अक्षय ऊर्जा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना है। उन्होंने ‘पीएम कुसुम योजना’ और ‘रूफटॉप सोलर योजना’ के तहत मिलने वाली सब्सिडी और उसके लाभों के बारे में भी जानकारी दी। इस दौरान छात्राओं दीक्षा, राधिका, निकिता, रितिका, एकता, दिव्या और नवधा ने भी लोगों को इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
शिविर के विशेष सत्र में राष्ट्रीय कोच श्रीमती आरती सैनी ने छात्राओं को वुशु मार्शल आर्ट के माध्यम से आत्मरक्षा के गुर सिखाए। उन्होंने कहा कि अपनी सुरक्षा के लिए सबसे पहली जरूरत आत्मविश्वास और अपनी आवाज बुलंद करना है।
वहीं छात्राओं की रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए मेहंदी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा निर्णायक मंडल डॉ. पल्लवी राणा और डॉ. मीनाक्षी शर्मा द्वारा की गई, जिसमें शिवानी ने प्रथम, तनु ने द्वितीय और ज्योति ने तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि मयूरी और वैभवी को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
आज के सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने में श्रीमती रचना गोस्वामी और विनीत कुमार का विशेष योगदान रहा।
एनएसएस शिविर के माध्यम से छात्राएं न केवल समाज सेवा के प्रति जागरूक हो रही हैं बल्कि आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी मजबूत संदेश दे रही

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