हरा रंग प्राकृतिक की निशानी

धर्म नगरी हरिद्वार में इन दिनों सौंदर्यीकरण और स्वच्छता अभियान तेज़ी से चल रहा है। इसी अभियान के तहत शहर में लगाए गए गमलों को हरे रंग से रंगा गया है।
लेकिन अब यह हरा रंग एक नया मुद्दा बनता नज़र आ रहा है।
श्री परशुराम खड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने गमलों के हरे रंग पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि मां गंगा की मर्यादा और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए एचआरडी विभाग द्वारा किए गए हरे रंग के स्थान पर भगवा रंग किया जाना चाहिए।
पंडित अधीर कौशिक ने अधिकारियों से हाथ जोड़कर अपील करते हुए कहा कि यदि समय रहते गमलों का रंग नहीं बदला गया, तो कुछ दिनों बाद वे स्वयं गमलों को भगवा रंग में रंग देंगे।
वहीं दूसरी ओर, हरे रंग को लेकर अलग राय भी सामने आ रही है।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हरा रंग प्रकृति, हरियाली और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
जैसे आकाश का रंग नीला और धरती का रंग हरा होता है, वैसे ही हरियाली सुंदरता और संतुलन को दर्शाती है।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अगर रंगों को लेकर इस तरह के सवाल उठाए जाएंगे, तो आगे चलकर हर प्राकृतिक रंग पर विवाद खड़ा हो सकता है।
फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मांग पर क्या रुख अपनाता है और क्या गमलों का रंग बदला जाएगा या नहीं।

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